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विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा कुरूद सिविल अस्पताल, गायनेकोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाएं निजी अस्पतालों में ईलाज कराने मजबूर

स्वीकार का भी पद खाली, बाह्य रोगियों के लिए शौचालय भी नहीं

IMG 20240716 144418श्रवण साहू,धमतरी। जिला प्रशासन स्वास्थ्य को लेकर बड़ी बड़ी दावे करती हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। सिविल अस्पताल कुरुद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ एवं निश्चेतना विशेषज्ञ के पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिस कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण लोग जिला अस्पताल एवं निजी अस्पतालों में ईलाज कराने मजबूर हैं। चिकित्सा अधिकारियों की भी कमी बतायी जा रही हैं। साथ ही अत्याधुनिक उपकरनों की भी दरकार है।

रोजाना 250 मरीज ईलाज कराने पहुँच रहें
सिविल अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए तरस रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मिलीं जानकारी के मुताबिक रोजाना ओपीडी में लगभग 250 की संख्या में मरीज ईलाज कराने आते हैं। यह संख्या बीमारियों के सीजन में 300 पार तक पहुंच जाती है।इलाज नहीं होने की स्थिति में गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। ऐसे में ज्यादातर मरीजों को अस्पताल से मायूस होकर लौटना पड़ता है।

अस्पताल का भवन हो चुका जर्जर                              मिलीं जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल का भवन सन 1952 का है। तब से भवन में अस्पताल संचालित हो रहा है। वर्तमान में 73 साल पुराना हो गया हैं जिस कारण भवन जर्जर स्थिति में पहुँच चुका हैं। हर साल इस भवन के रखरखाव में मोटी रकम खर्च कर करना पड़ता हैं। तब जाकर वह भवन उपयोग में आ रहा है। बीएमओ डॉ यू एस नवरत्न ने बताया कि भवन बहुत पुराना हैं जिस कारण बारिश के दिनों में सीलन होती है। अस्पताल भवन जर्जर होने कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती हैं। इस संबंध में पत्र लिखकर उच्चाधिकारी को अवगत करा दिया है।

सफाई कर्मचारी की कमी, बाह्य रोगियों के लिए शौचालय भी नहीं 
अस्पताल में दो स्वीपर के पद रिक्त है। जिसके कारण इतने बडे अस्पताल में साफ-सफाई बनाए रखना भी चुनौती भरा होता है। सफाई कर्मचारी एवं सुरक्षा गार्ड कर्मचारियों का भी अभाव रहता है। और जो कर्मचारी कार्यरत हैं उनसे काम पूरा नही हो पाता है क्योंकि अस्पताल में भर्ती मरीजों के अलावा बाह्य रोगी मरीजों का हर दिन आना जाना लगा रहता है। वहीं पार्किंग के लिए भी जगह का अभाव नजर आता हैं। पर एक अच्छी बात है कि गाड़ियों को किनारे व्यवस्थित लगाने के लिए बाकायदा एक कर्मचारी की नियुक्ति की गई है।

100 बिस्तर अस्पताल के उन्नयन के लिए नहीं है जगह : सिविल अस्पताल वर्तमान में 50 बिस्तर वाला अस्पताल हैं इसे 100 बिस्तर क्षमता वाला अस्पताल बनाने के लिए जगह की कमी हैं। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण अभी तक अस्पताल के उन्नयन पर ग्रहण लगा हुआ है। जब तक जर्जर पुराने भवन को डिस्मेंटल नही करते तब तक 100 बिस्तर अस्पताल का सपना सपना ही है। इसे साकार करने के लिए सबकी निगाहें विकास पुरूष पर टिकीं हुई है।

मेनू के अनुसार नहीं मिल रहा भोजन
अस्पताल में भर्ती मरीजों को परोसे जाने वाले भोजन की शिकायत आएं दिन मिलती रहती हैं। मरीजों का कहना है कि मेनू के अनुसार खाना नहीं मिलता। दाल पानी की तरह पतली रहती हैं, फल तो हमेशा थाली से गायब रहता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मरीजो को भोजन नगर के ही एक महिला समूह द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। मरीजों ने प्रबंधक से गुणवत्तायुक्त भोजन की मांग की है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार :
“विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी जिले सहित पूरे प्रदेश में बनी हुई है जैसे जैसे भर्ती हो रहीं रिक्तियों को फुलफिल किया जा रहा है।”
– नम्रता गांधी, कलेक्टर जिला धमतरी

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